Bihar Board Class 6 Sanskrit Chapter 5 मम परिवार: Summary
कक्षा-6 पाठ-5 मम परिवार:
पाठः – इदं मम गृहम् अस्ति । अत्र मम परिवारः निवसति । मम परिवारे अनेके जनाः सन्ति। मम् पितामहः वृद्धः अस्ति । स द्वारे एव खट्वायां तिष्ठति। मम पिता माता च गृहमध्ये वसतः । पिता बहिः कार्यं करोति। माता गृहकार्येषु लग्ना भवति । मम एका स्वसा अपि अस्ति । सा विद्यालये पठति। यदा-कदा गृहकार्यम् अपि करोति । अहमपि गृहस्य कार्येषु सहायता करोमि । विद्यालयं च पठनाय गच्छामि। मम कोऽपि भ्राता नास्ति।
अर्थ – यह मेरा घर है। यहाँ मेरा परिवार रहता है। मेरे परिवार में अनेक लोग हैं। मेरे दादा जी बूढा हैं। वे दरवाजे पर ही खटिया पर रहते हैं। मेरे पिता और माता घर के अन्दर रहते हैं। पिता जी बाहर काम करते हैं। माता जी घर के कामों में लगी रहती हैं। मुझको एक बहन भी है। वह विद्यालय में पढ़ती है। कभी-कभी घर के काम भी करती है। मैं भी घर के कामों में सहायता करती हूँ और स्कूल पढ़ने के लिए जाती हूँ। मुझे कोई भी भाई नहीं है।
पाठः – परिवारे पितृव्यः अपि अस्ति । पितव्यस्य एका पुत्री अस्ति । सा प्राङ्गणे क्रीडति । सा परिवारस्य प्रिया कन्या अस्ति । मम पिता पितव्यस्य ज्येष्ठः भ्राता अस्ति । तौ पितामहस्य सेवा कुरुतः । यदा-कदा मम् मातुलः अपि आगच्छति । सः कथाः कथयति, अस्माकं मनोरञ्जनं च करोति । वयं सर्वे परिवारे सुखेन निवसामः ।
अर्थ – परिवार में चाचा भी हैं। चाचा की एक बेटी है। वह आंगन में खेलती है। वह परिवार की प्रिय लडकी है। मेरे पिता चाचा के बड़े भाई हैं। वे दोनों दादा जी की सेवा करते हैं। कभी-कभी मेरे मामा भी आते हैं। वे कहानियाँ कहते हैं और हमलोगों का मनोरंजन करते हैं। हम सभी परिवार में सुख से रहते हैं।
शब्दार्था :-गृहम् – घर। अत्र – यहाँ। पितामहः – दादा। वृद्धः – बूढ़ा। द्वारे – दरवाजे पर। तिष्ठति – रहता है। ठहरता है। खवायाम् – खाट पर / में। बहिः – बाहर। स्वसा – बहन। अपि – भी। यदा-कदा – कभी-कभी। अहमपि- मैं भी (अहम + अपि)। कार्येषु – कामों में। पठनाय … पढ़ने के लिए। कोऽपि (क: + अपि) – कोई भी। भ्राता .. भाई। नास्ति (न + अस्ति)- नहीं है। पितृव्यः – चाचा। प्राङ्गणे – आंगन में । प्रिया – प्यारी। ज्येष्ठः – बड़ा। मातुलः – मामा। कथाः – कहानियाँ । कहानियों को। कथयति — कहता/कहती है/कहते हैं। सर्वे- सभी। निवसामः – (हमसब) निवास करते हैं।
व्याकरण
1. विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध-संस्कृत में जिस लिङ्ग, वचन और विभक्ति में विशेष्य (जिसकी विशेषता बतलाई जाए)होता है, विशेषण भी उसी लिङ्गः वचन और विभक्ति में होता है।
अर्थात् विशेष्य = विशेषण
जैसे-वृद्धः पितामहः। वृद्धा पितामही। प्रियः बालकः । प्रिया कन्या। मधुरं फलम् शोभनं कार्यम्। कुशलाः छात्राः विशाल. वृक्षः। पिशालाय परिवाराया विशाले प्राङ्गण। धनिकः परिवारः इत्यादिः।
2. अपि’ अव्यय है । जिसका अर्थ भी होता है। जिस शब्द में अपि लगता है वहाँ व्यक्त होता है कि उसके अलावा कोई भी दुसरा है। जैसे-अहमपि गच्छामि (मैं भी जा रहा हैं) । यहाँ व्यक्त हो रहा है कि -मेरे अलावा अन्य कोई दूसरा भी जा रहा है। स्वसा अपि अस्ति – (बहन भी है।) अर्थात बहन के अलावा कोई दुसरा व्यक्ति भी है गृहकार्यम् अपि करोति -(गृह कार्य भी करती है) अर्थात गृहकार्य के अलावा अन्य कार्य भी करती है। कोऽपि (क: + अपि) – कोई/कोई भी । यहाँ ‘अपि’ अनिश्चय का अर्थ भी देता है।
3. (क) जिन शब्दों के अन्त में म् हो, उनके बाद यदि व्यञ्जन से आरम्भ होने वाला शब्द रहे तो म् के स्थान पर अनुस्वार (.) हो जाता है।
जैसे-
इदम् + मम = इदं मम
खट्वायाम् + तिष्ठति = खट्वायां तिष्ठति
कार्यम् + करोति = कार्यं करोति
वयम् + सर्वे = वयं सर्वे
सेवाम् + कुरुतः = सेवां कुरुतः।
ये सभी उदाहरण इसी पाठ से हैं।
(ख) म से अन्त होने वाले शब्द के बाद यदि स्वर वर्ण से आरम्भ होने वाला शब्द रहे तो म् में वह स्वर मात्रा बनकर जड जाता है। जैसे-
त्वम् + अपि = त्वमपि
अहम् + आगच्छामि = अहमागच्छामि
विद्यालयम् + एव = विद्यालयमेव
पुष्यम् + इव = पुष्पमिव (फूल के समान)
अयम् + उष्ट्रः = अयमुष्ट्रः (यह ऊँट है।
गृहम् + अपि = गृहमपि
मुखम् + अस्ति = सुखामस्ति
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