Bihar Board Class 6 Sanskrit Summary
Chapter 4 क्रियापदपरिचयः
बालकः धावति।
अर्थ –एक लड़का दौड़ता है।
बालको धावतः ।
अर्थ –दो लड़के दौड़ते हैं।
बालकाः धावन्ति ।
अर्थ –लड़के दौड़ते हैं।
त्वम् हससि ।
अर्थ-तुम हँसते हो।
युवाम् हसथः ।
अर्थ –तुम दोनो हँसती हो।
यूयम् हसथ ।
अर्थ –तुम सब हँसती हो।
अहं पठामि ।
अर्थ –मैं पढ़ता हूँ।
आवाम पठावः ।
अर्थ –हम दोनों पढ़ते हैं।
वयम् पठामः।
अर्थ –हमसब पढ़ते हैं।
बालिका लिखति ।
अर्थ –लड़की लिखती है।
बालिके धावतः।
अर्थ –दो लड़कियाँ दौड़ती हैं।
बालिकाः पठन्ति ।
अर्थ –लड़कियाँ पढ़ती हैं।
पुष्पम् अस्ति ।
अर्थ-एक फूल है।
पुष्प स्तः।
अर्थ –दो फूल हैं।
पुष्पाणि सन्तिा मोहनः
अर्थ-तीन फूल हैं।
विद्यालयम् गच्छति ।
अर्थ –मोहन स्कूल जाता है।
बालिके अत्र आगच्छतः ।
अर्थ –दो लड़किय यहाँ अती हैं
वयम् जलम् पिबामः ।
अर्थ –हमसब जल पीते हैं।
घोटक: धावति ।
अर्थ-घोड़ा दौड़ता है।
घोटको धावतः ।
अर्थ-दो घोड़े दौड़ते हैं।
घोटकाः धावन्ति ।
अर्थ –घोड़े दौड़ते हैं।
गजः गच्छति ।
अर्थ –हाथी जाता है।
गजौ गच्छतः।
अर्थ –दो हाथी जाते हैं।
गजाः गच्छन्ति।
अर्थ-तीन हाथी जाते हैं।
एतत् किम् अस्ति।
अर्थ –यह क्या है।
एतत् फलम् अस्ति।
अर्थ –यह फल है।
एते के स्तः।
अर्थ-ये दोनों कौन हैं।
एते फले स्तः।
अर्थ-ये दोनों फल हैं।
एतानि कानि सन्ति।
अर्थ –ये सब कौन हैं।
एतानि फलानि सन्ति।
अर्थ-ये सब फल हैं।
व्याकरण
पुरुष-संस्कृत क्रियारूपों के प्रसंग में ‘पुरुष’ की चर्चा होती है। सभी क्रियारूप (धातुरूप) पुरुष और वचन के अनुसार पृथक्-पृथक् होते हैं। तीन पुरुष और तीन वचन से विभक्त होने के कारण प्रत्येक काल (लकार) में नौ-नौ रूप होते हैं।
पुरुष का अर्थ है वक्ता, श्रोता या चर्चित व्यक्ति । वक्ता को उत्तम पुरुष (अहम्, आवाम्, वयम्), श्रोता को मध्यम पुरुष (त्वम्, युवाम्, यूयम्) तथा चर्चित व्यक्ति को प्रथम पुरुष (सः, तौ, ते, अयम्, इमौ, इमे) कहते हैं । पुरुष
और वचन का प्रभाव धातुरूपों पर पड़ता है। इसलिए पुरुष-विशेष और वचन-विशेष के कारण क्रियापदों में भेद होता है।
विशेष – संस्कृत क्रियापदों का प्रयोग सभी लिंगों के लिए एकसमान होता है। इसलिए लड़की के पढ़ने के विषय में भी – सा पठति, त्वम् पठसि (तुम पढ़ती हो), अहम् पठामि (मैं पढ़ती हूँ) इत्यादि प्रयोग होते हैं
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