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BSEB,Sanskrit उपसर्ग- परिभाषा एवं संख्या उदाहरण सहित। संस्कृत व्याकरण में कुल 22 उपसर्गBSEB,Sanskrit

BSEB,Sanskrit उपसर्ग- परिभाषा एवं संख्या उदाहरण सहित। संस्कृत व्याकरण में कुल 22 उपसर्गBSEB,Sanskrit

ऐसे धातु जो समीप रखे जाते हो, उन्हे उपसर्ग के नाम से जाना जाता है।
उपसर्ग का इस्तेमाल से किसी भी शब्द के मूल शब्द के अर्थ में परिवर्तन आने लगता है। इसी प्रकार संस्कृत व्याकरण में कुल 22 उपसर्ग होते है, जो कि निम्न हैं:
  1. प्र
  2. परा
  3. अप
  4. सम्‌
  5. अनु
  6. अव
  7. निस्‌
  8. निर्‌
  9. दुस्‌
  10. दुर्‌
  11. वि
  12. आ (आङ्‌)
  13. नि
  14. अधि
  15. अपि
  16. अति
  17. सु
  18. उत् /उद्‌
  19. अभि
  20. प्रति
  21. परि
  22. उप

उपसर्ग के साथ प्रयुक्त कुछ धातु रूप

१. प्र:

  • प्र+भवति = प्रभवति = प्रकट होता है।
  • प्र + नमति = प्रणमति = झुककर प्रणाम करता है।
  • प्र + नयति = प्रणयति = रचना (या प्रेम) करता है।
  • प्र + हरति = प्रहरति = प्रहार करता है।

२. परा :

  • परा + भवति = परा भवति = पराजित होता है।
  • परा + जयति = पराजयते = पराजित करता है।
  • परा + अयते = पलायते = भागता है।
  • परा + करोति = पराकरोति = भगाता है।

३. अप :

  • अप + करोति = अपकरोति = बुराई करता है।
  • अप + सरति = अपसरति = दूर हटता है।
  • अप+जानाति = अपजानीते = अस्वीकार करता है।
  • अप + एति = अपैति = दूर होता है।

४. सम् :

  • सम् + भवति = सम्भवति = सम्भव होता है।
  • सम् + क्षिपति = संक्षिपति = संक्षेप करता है।
  • सम् + चिनोति = सञ्चिनोति = इकट्ठा करता है।
  • सम् + गृह्णाति = संगृह्णाति = संग्रह करता है।

५. अनु :

  • अनु + भवति = अनुभवति = अनुभव करता है।
  • अनु + करोति = अनुकरोति = अनुकरण करता है।
  • अनु + गच्छति = अनुगच्छति = पीछे जाता है।
  • अनु + जानाति = अनुजानाति = आज्ञा देता है।
  • अव + गच्छति = अवगच्छति = समझता है।
  • अव + क्षिपति = अवक्षिपति = निन्दा करता है।
  • अव + जानाति = अवजानाति = अनादर करता है।
  • अव + तरति = अवतरति = नीचे उतरता है।
  • निस + सरति = निस्सरति = निकलता है।
  • निस + चिनोति = निश्चिनोति = निश्चय करता है।
  • निस् + क्रामति = निष्कामति = निकलता है।
  • निस + तरति = निस्तरति = समाप्त करता है।

८. निर् :

  • निर् + ईक्षते = निरीक्षते = निगरानी करता है।
  • निर् + वहति = निर्वहति = निर्वहन करता है।
  • निर् + अस्यति = निरस्यति = हटाता है।
  • निर + गच्छति = निर्गच्छति = निकलता है।

९. दुस् :

  • दुस् + चरति = दुश्चरति = बुरा काम करता है।
  • दुस् + करोति = दुष्करोति = दुष्कर्म करता है।
  • दुस् + तरति = दुस्तरति = कठिनाई से तैरता है।

१०. दुर् :

  • दुर् + बोधति = दुर्बोधति = कठिनाइयों से समझता है।
  • दुर् + गच्छति = दुर्गच्छति = दुःख भोगता है।
  • दुर् + नयति = दुर्नयति = अन्याय करता है।

११. वि :

  • वि + तरति = वितरति = बाँटता है।
  • वि + आप्नोति = व्याप्नोति = फैलता है।
  • वि + नयति = विनयते = चुकाता है।
  • वि + जयति = विजयते = जीतता है।

१२. आङ् :

  • आ+ नयति = आनयति = लाता है।
  • आ + चरति = आचरति = आचरण करता है।
  • आ + गच्छति = आगच्छति = आता है।
  • आ + रोहति = अरोहति = चढ़ता है।

१३. नि :

  • नि + वेदयति = निवेदयति = निवेदन करता है।
  • नि+ वर्तते = निवर्तते = लौटता है।
  • नि + विशति = निविशते = घुसता है।
  • नि + दधाति निदधाति = विश्वास रखता है।

१४. अधि :

  • अधि + करोति = अधिकरोति = अधिकार करता है।
  • अधि + गच्छति = अधिगच्छति = प्राप्त करता है।
  • अधि + आस्ते = अध्यास्ते = बैठता है।
  • अधि + वसति = अधिवसति = निवास करता है।

१५. अपि :

  • अपि + गिरति = अपिगिरति = स्तुति करता है।
  • अपि + धत्ते = अपिधत्ते = हँकता है।

१६. अति :

  • अति + शेते = अतिशेते = बढ़कर होता है।
  • अति + वाहयति = अतिवाहयति = बिताता है।
  • अति + क्रामति = अतिक्रामति = अतिक्रमण करता है।
  • अति + एति = अत्येति = पार करता है।

१७. सु :

  • सु + पचति = सुपचति = अच्छी तरह पकाता है।
  • सु + शोभते = सुशोभते = बहुत शोभता है।
  • सु + चरति = सुचरति = अच्छा वर्ताव करता है।
  • स + करोति = सकरोति = पुण्य करता है।

१८. उत् :

  • उत् + गच्छति = उद्गच्छति = ऊपर जाता है।
  • उत् + भवति = उद्भवति = उत्पन्न होता है।
  • उत् + तिष्ठति = उत्तिष्ठति = उठता है।
  • उत् + हरति = उद्धरति = उद्धृत करता है।

१९. अभि :

  • अभि + भवति = अभिभवति = अपमानित करता है।
  • अभि + मन्यते = अभिमन्यते = अभिमान करता है।
  • अभि + अस्यति = अभ्यस्यति = अभ्यास करता है।
  • अभि + दधाति = अभिदधाति = कहता है।

२०. प्रति :

  • प्रति + करोति = प्रतिकरोति = प्रतिकार या उपाय करता है। .
  • प्रति + ईक्षते = प्रतीक्षते = प्रतीक्षा करता है।
  • प्रति + गृह्णाति = प्रतिगृह्णाति = स्वीकार करता है।
  • प्रति + एति = प्रत्येति = विश्वास करता है।

२१. परिः

  • परि + नयति = परिणयति = विवाह करता है।
  • परि + ईक्षते = परीक्षते = परीक्षा लेता है।
  • परि + क्रमते = परिक्रमते = परिक्रमा करता है।
  • परि + दधाति = परिदधाति = पहनता है।

२२. उप :

  • उप + करोति = उपकरोति = उपकार करता है।
  • उप + दिशति = उपदिशति = उपदेश देता है।
  • उप + एति = उपैति = निकट जाता है।
  • उप + चरति = उपचरति = सेवा करता है।
  • उप + नयति = उपनयति = समीप लाता है।


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